aarzoo ko dil hi dil men ghut ke rahna aa gaya | आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया

  - Anand Narayan Mulla

आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया
और वो ये समझे कि मुझ को रंज सहना आ गया

पोंछता कोई नहीं अब मुझ से मेरा हाल-ए-दिल
शायद अपना हाल-ए-दिल अब मुझ को कहना आ गया

सब की सुनता जा रहा हूँ और कुछ कहता नहीं
वो ज़बाँ हूँ अब जिसे दाँतों में रहना आ गया

ज़िंदगी से क्या लड़ें जब कोई भी अपना नहीं
हो के शल धारे के रुख़ पर हम को बहना आ गया

लाख पर्दे इज़्तिराब-ए-शौक़ पर डाले मगर
फिर वो इक मचला हुआ आँसू बरहना आ गया

तुझ को अपना ही लिया आख़िर निगार-ए-इश्क़ ने
ऐ उरूस-ए-चश्म ले मोती का गहना आ गया

पी के आँसू सी के लब बैठा हूँ यूँँ इस बज़्म में
दर-हक़ीक़त जैसे मुझ को रंज सहना आ गया

एक ना-शुकरे चमन को रंग-ओ-बू देता रहा
आ गया हाँ आ गया काँटों में रहना आ गया

लब पे नग़्मा और रुख़ पर इक तबस्सुम की नक़ाब
अपने दिल का दर्द अब 'मुल्ला' को कहना आ गया

  - Anand Narayan Mulla

Environment Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Anand Narayan Mulla

As you were reading Shayari by Anand Narayan Mulla

Similar Writers

our suggestion based on Anand Narayan Mulla

Similar Moods

As you were reading Environment Shayari Shayari