तू छोड़ कर गया है मुझे ऐसे हाल में
दिन रात उलझा रहता हूँ तेरे ख़याल में
ये ठीक बात है कि मैं वैसा नहीं रहा
तू भी बदल गया है बहुत तीन साल में
लहजा ही थोड़ा तल्ख़ है दुनिया के सामने
वैसे तो ठीक ठाक हूँ मैं बोल-चाल में
जिन को था फूल तोड़ना वो तोड़ ले गए
माली लगा ही रह गया बस देख-भाल में
दरकार इस लिए है अलग रास्ता मुझे
सब लोग ही लगे हैं यहाँ भेड़-चाल में
दुनिया में अा के फँस गया हूँ इस तरह से मैं
मछली फंसी हुई हो कोई जैसे जाल में
— Ankit Maurya















