"कोई दुख है"
कोई दुख है के जिस का काटना चींटी के जैसा है
जो चींटी आ घुसी थी शर्ट के अंँदर टंगा जो हैंगर पर था
बिना झाड़े बिना झटके ज़रा आनन व फ़ानन में,
बटन बांधे क़दम साधे।
ज़रा सी किलकिली या झनझनाहट भी हुई थी पर
मुझे एहसास न इस बात का
समय बीता समय पीता हुआ सदियों के प्यासे सा
जलन कुछ फिर उठी मन में मेरे तब इक ख़याल आया
कोई दुख है के जिस का काटना चींटी के जैसा है
— Anmol Mishra















