ख़ामोशियाँ ग़ुलाम बनाती हैं शोर कोशब इश्क़ के उसूल सिखाती चकोर कोदिन भर तो मेरे यार मेरे यार थे बहुतपर शाम को गया जो वो लौटा न भोर को— Anmol Mishra