इक इक मिसरे में करनी हैं
तुम से कुछ बातें करनी हैं
शाम ढले तुम आओ मिलने
मिल कर के रातें करनी हैं
इक अरसे से अश्क सँभाले
हम को बरसातें करनी हैं
— anupam shah
तुम से कुछ बातें करनी हैं
शाम ढले तुम आओ मिलने
मिल कर के रातें करनी हैं
इक अरसे से अश्क सँभाले
हम को बरसातें करनी हैं
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