मेरे लब पर अगर कभी आई रक़्स करती हुई हँसी आईउन के मुझ पर सितम बढ़े जब सेदर्द दिल में बहुत कमी आईहँसते हँसते निकल पड़े आँसूरोते रोते कभी हँसी आईरक़्स करने लगे मिरे अरमाँयाद जब उन की झूमती आईमिशअल-ए-राह बन के ऐ 'ताबाँ'उन के जल्वों की रौशनी आई— Anwar Taban