दरमियाँ अपने है जो मंज़र बदल कर देखिए
बर्ग-ए-गुल के साथ ये ख़ंजर बदल कर देखिए
गर इबादत और दुआएँ बे-असर हैं आपकी
बुतकदे के आप सब पत्थर बदल कर देखिए
होश में हैं आप गर इस बेख़ुदी के दौर में
बार मय साक़ी या फिर साग़र बदल कर देखिए
रास्ता तो ठीक है मेरी समझ से आप का
आप ऐसा कीजिए रहबर बदल कर देखिए
आप से हम तो मुख़ातिब हैं मुहब्बत से मगर
आप भी अपने ज़रा तेवर बदल कर देखिए
हर दफ़ा बस आप ही आएँगे अपने रू-ब-रू
चाहे लाखों आईने 'जस्सर' बदल कर देखिए
— Avtar Singh Jasser














