khwaah kar insaaf zalim khwaah kar bedaad tu | ख़्वाह कर इंसाफ़ ज़ालिम ख़्वाह कर बेदाद तू

  - Bahadur Shah Zafar

ख़्वाह कर इंसाफ़ ज़ालिम ख़्वाह कर बेदाद तू
पर जो फ़रियादी हैं उन की सुन तो ले फ़रियाद तू

दम-ब-दम भरते हैं हम तेरी हवा-ख़्वाही का दम
कर न बद-ख़ुओं के कहने से हमें बर्बाद तू

क्या गुनह क्या जुर्म क्या तक़्सीर मेरी क्या ख़ता
बन गया जो इस तरह हक़ में मिरे जल्लाद तू

क़ैदस तेरी कहाँ जाएँगे हम बे-बाल-ओ-पर
क्यूँँ क़फ़स में तंग करता है हमें सय्याद तू

दिल को दिल से राह है तो जिस तरह से हम तुझे
याद करते हैं करे यूँँ ही हमें भी याद तू

दिल तिरा फ़ौलाद हो तो आप हो आईना-वार
साफ़ यक-बारी सुने मेरी अगर रूदाद तू

शाद ओ ख़ुर्रम एक आलम को किया उस ने 'ज़फ़र'
पर सबब क्या है कि है रंजीदा ओ नाशाद तू

  - Bahadur Shah Zafar

Duniya Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Bahadur Shah Zafar

As you were reading Shayari by Bahadur Shah Zafar

Similar Writers

our suggestion based on Bahadur Shah Zafar

Similar Moods

As you were reading Duniya Shayari Shayari