वो वक़्त हमारा अच्छा था
जब सिर्फ़ गुज़ारा होता था
दरवेश नगर में था इक जो
वो बात मिरी ही करता था
मुस्कान लबों पर थी उस की
जो शख़्स निहायत रूठा था
इक आस रखी थी हम ने भी
इक ख़्वाब मिला जो टूटा था
जो नाम पुकारा था उस ने
वो नाम हमारा झूठा था
— Dr Saniya Tasnim















