बदल जा तू नहीं तो रब का ये पैग़ाम आएगा
तू ज़ालिम हर जगह से बेबसों नाकाम आएगा
हमारे मुल्क की बर्बादियों का ज़िक्र जब होगा
सर-ए-फहरिस्त ऐ ज़ालिम तेरा ही नाम आएगा
न कर मायूस इनको चार दिन की नौकरी दे कर
हमारे मुल्क की सरहद पे इनका काम आएगा
अभी भी वक़्त है कुछ कर ले अच्छे काम तू वरना
वज़ीर-ए-मुल्क की गद्दी पे ये औहाम आएगा
अभी हिंदू अभी मुस्लिम तू करना छोड़ दे ज़ालिम
नहीं तो अब यहाँ ''दानिश'' यूँँ ही कोहराम आएगा
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