'इश्क़ में यारों हरदम रोना पड़ता है
अश्कों से दामन को भिगोना पड़ता है
छोड़ के जाते हैं अपने ही लोग यहाँ
मजबूरी में तन्हा होना पड़ता है
हिज्र के ग़म जब भी तुमको याद आएँगे
रातों में फिर देर से सोना पड़ता है
रूठ गया है मेरा दिल सहते सहते
ग़ज़लों में अब दर्द पिरोना पड़ता है
'दानिश' 'इश्क़ भी करना इक मुश्किल फ़न है
दिल का ज़ख़्म नमक से धोना पड़ता है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Danish Balliavi
our suggestion based on Danish Balliavi
As you were reading Aansoo Shayari Shayari