तुझको देखता हूँ तो दिल मेरा मचलता है
देख कर ज़माना ये यार ख़ूब जलता है
मुंतज़िर भी रहते हैं देखने की ख़ातिर लोग
ख़ुद को वो सजा कर के घर से जब निकलता है
चूमता है होंठों को जब कभी मेरा हमदम
इक रक़ीब है मेरा अपनी आँख मलता है
ख़ूबसूरती देखो दोस्त उसके लहजे में
करता हूँ मैं तारीफ़ें तब ये जी बहलता है
आसमाँ के जानिब तू देखता है क्या 'दानिश'
देख चाँद तेरे अब बाम पर टहलता है
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