"याद-ए-बेवफ़ा"
बे-वफ़ा बे-वफ़ा बे-वफ़ा बे-वफ़ा
बे-वफ़ा बे-वफ़ा ऐ मेरी बे वफ़ा
याद आएँगी मुझ को तेरी हर जफ़ा
क्या से क्या हो गया मैं तेरे प्यार में
दिल लगाया था तुझ से यूँ बेकार में
प्यार करना भी इक ज़ुर्म है और ख़ता
प्यार ज़्यादा मैं करता हूँ तुझ से फ़क़त
मैं ने नफ़रत न की तुझ से जाँ आज तक
वो सबब तू बता क्यूँ किया अलविदा
सर झुका कर के माँगा था तुझ को सनम
तू न मुझ को मिला हो गई आँखें नम
तुझ को आबाद रक्खे मेरा वो ख़ुदा
तेरी यादों को दिल में बसाऊँगा मैं
ये तो मुमकिन नहीं भूल जाऊँगा मैं
याद करता है 'दानिश' ये तुझ को सदा
— Danish Balliavi















