बस एक लफ़्ज़ मिरा फूल सा खिला देगा
बहार बन के तिरे घर को भी सजा देगा
मुझे है नाज़ मिरा बख़्त है बुलंद बहुत
ये बख़्त मेरा तुझे बादशाह बना देगा
मिरी गवाही को आधा नहीं समझना तुम
ये इक गवाह तुझे दार पे चढ़ा देगा
ख़ुलूस तेरा मुझे हो अगर मुयस्सर तो
तो प्यार मेरा तुझे गुल्सिताँ बना देगा
तू चाँद मेरे लिए आसमाँ से लाना नहीं
मिरा क़लम तो इसे हाथ से बना देगा
— Dilshad Naseem















