वो मुझे ज़िंदगी बताता हैफिर भला क्यूँ नज़र चुराता हैमैं उसी को उठा रहा था परवो मुझे ही फ़क़त गिराता हैयाद उस को किया यहाँ मैं नेपर मुझे वो वहाँ भुलाता हैराज़ सारे बता दिए मैं नेक्यूँ मगर राज़ वो छुपाता हैलोग मसरूफ़ हैं मोहब्बत मेंऔर वो दिल मेरा दुखाता है— Divyansh Rawat