रौशनी की कोई सरहद नहीं
कोई मज़हब नहीं
हवा का कोई जिस्म नहीं
कोई मुल्क नहीं
पानी का कोई रंग नहीं
रौशनी को कोई नाम न दो
हवा को कोई जिस्म न दो
पानी को रंगीन न बनाओ
पानी में लहू न मिलाओ
— Ehtisham Akhtar
कोई मज़हब नहीं
हवा का कोई जिस्म नहीं
कोई मुल्क नहीं
पानी का कोई रंग नहीं
रौशनी को कोई नाम न दो
हवा को कोई जिस्म न दो
पानी को रंगीन न बनाओ
पानी में लहू न मिलाओ
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