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अच्छों से पता चलता है इंसाँ को बुरों का
रावन का पता चल न सका राम से पहले
Rizwan Banarasi
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हृदय में बसे हों अगर राम तेरे
बनेंगे सभी फिर रुके काम तेरे
Kavi Naman bharat
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क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले
राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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इस बरस दोस्तों रावण के दहन पर मैंने
अपने अंदर के भी रावण का दहन करना है
Shajar Abbas
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वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी त'अल्लुक़ था
दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से
Kaif Bhopali
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जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है
हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं
Jamuna Parsad Rahi
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है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है
Nazeer Akbarabadi
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राम सिया के बीच रहा जो प्रेम मिले
अंतस के रावण की लंका जल जाए
Atul K Rai
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बड़ी शिद्दत से जो पुतला सजाया था
सभी मिल के उसे ही अब जलाएंगे
Alankrat Srivastava
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हम में जितने राम हैं सब बनवास पे हैं
हम में जितने रावण हैं सब राजा हैं
Nomaan Shauque
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अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना
अब नाम किसी शख़्स का रावन न मिलेगा
Anwar Jalalpuri
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राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था
दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था
Pratap Somvanshi
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दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
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लक्ष्मण-रेखा भी आख़िर क्या कर लेगी
सारे रावण घर के अंदर निकलेंगे
Pratap Somvanshi
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चारों ओर हज़ारों रावण हर रावण के सर हैं दस
लेकिन याद रहे सब कुछ दो चार दिनों का खेल है बस
Nomaan Shauque
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