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Dussehra Shayari
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SHER
अच्छों से पता चलता है इंसाँ को बुरों का
रावन का पता चल न सका राम से पहले
Rizwan Banarasi
अच्छों से पता चलता है इंसाँ को बुरों का रावन का पता चल न सका राम से पहले — Rizwan Banarasi
SHER
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले
राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
क्या सितम करते हैं मिट्टी के खिलौने वाले राम को रक्खे हुए बैठे हैं रावण के क़रीब — Asghar Mehdi Hosh
SHER
वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था
दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से
Kaif Bhopali
वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से — Kaif Bhopali
SHER
है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है
Nazeer Akbarabadi
है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर' पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है — Nazeer Akbarabadi
SHER
बड़ी शिद्दत से जो पुतला सजाया था
सभी मिल के उसे ही अब जलाएंगे
Alankrat Srivastava
बड़ी शिद्दत से जो पुतला सजाया था सभी मिल के उसे ही अब जलाएंगे — Alankrat Srivastava
SHER
अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना
अब नाम किसी शख़्स का रावन न मिलेगा
Anwar Jalalpuri
अब नाम नहीं काम का क़ाएल है ज़माना अब नाम किसी शख़्स का रावन न मिलेगा — Anwar Jalalpuri
SHER
दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले
ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले
Shakeel Azmi
दर्द में शिद्दत-ए-एहसास नहीं थी पहले ज़िंदगी राम का बन-बास नहीं थी पहले — Shakeel Azmi
SHER
चारों ओर हज़ारों रावण हर रावण के सर हैं दस
लेकिन याद रहे सब कुछ दो चार दिनों का खेल है बस
Nomaan Shauque
चारों ओर हज़ारों रावण हर रावण के सर हैं दस लेकिन याद रहे सब कुछ दो चार दिनों का खेल है बस — Nomaan Shauque
SHER
हृदय में बसे हों अगर राम तेरे
बनेंगे सभी फिर रुके काम तेरे
Kavi Naman bharat
हृदय में बसे हों अगर राम तेरे बनेंगे सभी फिर रुके काम तेरे — Kavi Naman bharat
SHER
इस बरस दोस्तों रावण के दहन पर मैं ने
अपने अंदर के भी रावण का दहन करना है
Shajar Abbas
इस बरस दोस्तों रावण के दहन पर मैं ने अपने अंदर के भी रावण का दहन करना है — Shajar Abbas
SHER
जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है
हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं
Jamuna Parsad Rahi
जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं — Jamuna Parsad Rahi
SHER
राम सिया के बीच रहा जो प्रेम मिले
अंतस के रावण की लंका जल जाए
Atul K Rai
राम सिया के बीच रहा जो प्रेम मिले अंतस के रावण की लंका जल जाए — Atul K Rai
SHER
हम में जितने राम हैं सब बन-वास पे हैं
हम में जितने रावण हैं सब राजा हैं
Nomaan Shauque
हम में जितने राम हैं सब बन-वास पे हैं हम में जितने रावण हैं सब राजा हैं — Nomaan Shauque
SHER
राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था
दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था
Pratap Somvanshi
राम तुम्हारे युग का रावन अच्छा था दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था — Pratap Somvanshi
SHER
लक्ष्मण-रेखा भी आख़िर क्या कर लेगी
सारे रावण घर के अंदर निकलेंगे
Pratap Somvanshi
लक्ष्मण-रेखा भी आख़िर क्या कर लेगी सारे रावण घर के अंदर निकलेंगे — Pratap Somvanshi
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