unke ghar se mere ghar ka rastaa seedha karna hai | उनके घर से मेरे घर का रस्ता सीधा करना है

  - Gagan Bajad 'Aafat'

उनके घर से मेरे घर का रस्ता सीधा करना है
लाखों आशिक़ होड़ लगी है कब्जा सीधा करना है

वैसे घर में कुछ भी नहीं है चंद किताबें एक बिस्तर
वो घर में आने वालें है कमरा सीधा करना है

दिल टूटे या घर गिर जाए तकलीफें तो होंगी ही
रो भी लेंगे लेकिन पहले मलबा सीधा करना है

चंद लकीरे दिल ओ ज़हन पर हावी होने वाली है
सरहद दिल में बैठ रही है नक़्शा सीधा करना है

दानिशमंदों की दुनिया में एक हम है जो पागल है
जिनको इस दुनिया में सब कुछ सीधा सीधा करना है

मेरे दिल में आने को तो इतने सारे राजी हैं
मुझको बस इतना करना है लहजा सीधा करना है

चित आया तो मैं तेरा हूँ पट आया तो तू मेरा
बोल ज़रा तेरी मर्ज़ी? ये सिक्का सीधा करना है

आग लगाने वाले जग में जीने का हक मांग रहे
उनके हक में मुझको बस ये भाला सीधा करना है

धर्म कमाने वालों ने ही दुनिया का नुकसान किया
हौ मुश्किल भरपूर मगर ये घाटा सीधा करना है

यार खिलाफत करने वाले मरते थे मर जाएँगे
मुझको मरने से पहले ये खाका सीधा करना है

  - Gagan Bajad 'Aafat'

Aawargi Shayari

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