vo dekhne mujhe aanaa to chahta hogaa | वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा

  - Habib Jalib

वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा
मगर ज़माने की बातों से डर गया होगा

उसे था शौक़ बहुत मुझ को अच्छा रखने का
ये शौक़ औरों को शायद बुरा लगा होगा

कभी न हद्द-ए-अदब से बढ़े थे दीदा ओ दिल
वो मुझ से किस लिए किसी बात पर ख़फ़ा होगा

मुझे गुमान है ये भी यक़ीन की हद तक
किसी से भी न वो मेरी तरह मिला होगा

कभी कभी तो सितारों की छाँव में वो भी
मिरे ख़याल में कुछ देर जागता होगा

वो उस का सादा ओ मासूम वालेहाना-पन
किसी भी जुग में कोई देवता भी क्या होगा

नहीं वो आया तो 'जालिब' गिला न कर उस का
न-जाने क्या उसे दरपेश मसअला होगा

  - Habib Jalib

Shikwa Shayari

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