शहर में हूँ का आलम था जिन था या रेफ़्रेनडम थाक़ैद थे दीवारों में लोगबाहर शोर बहुत कम थाकुछ बा-रीश से चेहरे थेऔर ईमान का मातम थामर्हूमीन शरीक हुएसच्चाई का चहलम थादिन उन्नीस दिसम्बर काबे-मअ'नी बे-हँगम थाया वा'दा था हाकिम काया अख़बारी कॉलम था— Habib Jalib