हमें रिश्तों से अग़्यारी नहीं है
मुहब्बत है अदाकारी नहीं है
मुहब्बत दिल लगी है, बंदगी है
मुहब्बत कोई बीमारी नहीं है
मैं जितना तेज़ बोलूँ फिर भी कम है
मेरी आवाज़ अब भारी नहीं है
करूँगा मैं तुझे फिर से पशेमाँ
अभी ये ज़िंदगी हारी नहीं है
अगर महबूब से ऊबे हुए हो
तो तुम में अब वफ़ादारी नहीं है
— Hameed Sarwar Bahraichi















