kisi ne hamko diya hai ye mashwara behtar | किसी ने हमको दिया है ये मशवरा बेहतर

  - Hameed Sarwar Bahraichi

किसी ने हमको दिया है ये मशवरा बेहतर
जिन्हें ग़ुरूर हो उन सेे तो फ़ासला बेहतर

निभे न एक से रिश्ता तो दूसरा बेहतर
हमें बता के गए हैं ये रहनुमा बेहतर

भरो उड़ान तो उड़ते रहो फ़ज़ाओं में
ज़मीं पे रेंगते रहने से वो ख़ला बेहतर

किसी के लाख उठाने पे भी न उठ पाया
सदा-ए-रिंद जो गूजी मैं उठ चला बेहतर

बुझा बुझा के सभी थक गए मगर इक रोज़
चराग़ बन के ज़माने में मैं जला बेहतर

कभी मिलेंगे सनम हम तो बस ये पूछेंगे
हमें तो ख़ाक मिली तुमको क्या मिला बेहतर

  - Hameed Sarwar Bahraichi

Faasla Shayari

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