"प्यार की निशानी"
इक निशानी पल रही है प्यार की
और क्या ख़्वाहिश करूँ संसार की
एक नन्हीं जान मेरे दिल में है
शुक्रिया करती रहूॅं मैं यार की
और क्या ख़्वाहिश करूँ संसार की
अपने हाथों से उसे सहला रही
मन ही मन ख़ुश हो रही और गा रही
है ख़ुशी इस बात की मेरे ख़ुदा
हो न पाएँगे कभी अब हम जुदा
ये जो मेरी कोख में है पल रहा
मिल रही है हर ख़ुशी दिलदार की
और क्या ख़्वाहिश करूँ संसार की
— Hameed Sarwar Bahraichi















