usse poochho jise manana hai | उससे पूछो जिसे मनाना है

  - Harsh saxena

उससे पूछो जिसे मनाना है
तुम को तो सिर्फ़ रूठ जाना है

यार मेरी यही तो ख़्वाहिश है
तेरे ही साथ घर बसाना है

तुमको बस डालने हैं स्टेटस्हमको तो रिश्ता भी निभाना है

उफ़ मुझे देख तेरा शर्माना
क़त्ल का ये नया बहाना है

तुझको ही गुनगुनाते फिरते हैं
जैसे तू मीठा सा तराना है

जाँ कभी तो अकेले में आओ
तुमको अपने गले लगाना है
'इश्क़ में तेरे मर नहीं सकते
बेटे का फर्ज़ भी निभाना है

कोई तो हो जो तोड़े दिल मेरा
हम को महफ़िल में दाद पाना है

  - Harsh saxena

Mehboob Shayari

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