saa | साथी यहाँ मिरा अब कोई रहा नहीं

  - SAAGAR SINGH RAJPUT
साथीयहाँमिराअबकोईरहानहीं
मैंझूठतोकभीभीकुछबोलतानहीं
भगवानबनरहाहैइंसानआजका
शायदउसेअभीग़मकोईमिलानहीं
मैंचारसालसेअपनेघरनहींगया
कितनाअजीबहूँमैंअबतकमरानहीं
मुझकोबुराकहोयाअच्छाकहोमुझे
मैंआजकलज़ियादाकुछसोचतानहीं
अपनेमिरेमुझेकहतेहैंबुराभला
कैसेकहूँकिमैंइतनाभीबुरानहीं
सहतारहाहमेशाहरग़मख़ुशीख़ुशी
मुझकोमिरेपितासाकोईमिलानहीं
हरदर्दबिनशिकायतमाँसहगईमिरी
लेकिनकभीकिसीसेकुछभीकहानहीं
पहचानतेसभीहैंमुझकोयहाँवहाँ
लेकिनमुझेमिराअपनाहीपतानहीं
धोखामुझेयहाँसबदेतेरहेसदा
मैंनेकभीकिसीसेभीकीदग़ानहीं
क़िस्मतमिरीशुरूसेहीहैख़राबपर
इसकामुझेकिसीसेकुछभीगिलानहीं
कलरातरोरहीथीइकबे-वफ़ापरी
कलरातजालमेंकोईभीफँसानहीं
मुझकोनहींसमझसकतेएकबारमें
इकबारमेंकभीभी'सागर'खुलानहीं
'सागर'छुपारहाहैहरग़मदियातिरा
वर्नाजहानमेंतुझसाबे-वफ़ानहीं
  - SAAGAR SINGH RAJPUT
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