har mushkil aasaan banaane vaala tha | हर मुश्किल आसान बनाने वाला था

  - Iftikhar Falak Kazmi

हर मुश्किल आसान बनाने वाला था
मैं पत्थर के पान बनाने वाला था

ख़्वाबों की तावील समझ से बाहर थी
जब मैं पाकिस्तान बनाने वाला था

हक़ बाहू हक़ बाहू कह कर एक फ़क़ीर
बाहू को सुलतान बनाने वाला था

मुझ ऐसा बहलोल कहाँ से लाओगे
नार से जो नारान बनाने वाला था

शहज़ादी ने जिस की ख़ातिर ज़हर पिया
इक देहाती नान बनाने वाला था

आप ने मेरा हाथ न थामा होता तो
मैं ख़ुद को शैतान बनाने वाला था

दरवाज़ों की साख बचाने की ख़ातिर
दीवारों के कान बनाने वाला था

आप की इक इक बात ग़ज़ल में ढाल के मैं
आन की आन में तान बनाने वाला था

  - Iftikhar Falak Kazmi

Ehsaas Shayari

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