साथ तू है तो क्या से क्या हूॅं मैं
वरना तो लाश हूॅं ख़ला हूॅं मैं
जिस की बाँहों में जा के गिरना था
उस की नज़रों में गिर गया हूॅं मैं
'इश्क़ में क्या ही हो सका मुझ से
अपनी इज़्ज़त गॅंवा रहा हूॅं मैं
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