साथ तू है तो क्या से क्या हूँ मैं
वरना तो लाश हूँ ख़ला हूँ मैं
जिस की बाँहों में जा के गिरना था
उस की नज़रों में गिर गया हूँ मैं
इश्क़ में क्या ही हो सका मुझ से
अपनी इज़्ज़त गॅंवा रहा हूँ मैं
— Intzar Akhtar
वरना तो लाश हूँ ख़ला हूँ मैं
जिस की बाँहों में जा के गिरना था
उस की नज़रों में गिर गया हूँ मैं
इश्क़ में क्या ही हो सका मुझ से
अपनी इज़्ज़त गॅंवा रहा हूँ मैं
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