हर तरफ़ कर दी खड़ी दीवार है अब
हो गया मुश्किल तिरा दीदार है अब
थक गया हूँ मैं मुसलसल इम्तिहाँ से
इम्तिहाँ वो और भी इक बार है अब
मेहनतों का अब सिला अब हक़ मिलेगा
देखना ये ख़्वाब भी बेकार है अब
— Taufique Habib
हो गया मुश्किल तिरा दीदार है अब
थक गया हूँ मैं मुसलसल इम्तिहाँ से
इम्तिहाँ वो और भी इक बार है अब
मेहनतों का अब सिला अब हक़ मिलेगा
देखना ये ख़्वाब भी बेकार है अब
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