कुछ न होने से फिर यही होगाअपना पेशा भी शा'इरी होगाअब नहीं दिल किसी ख़ुशी पर ख़ुशदिल किसी बात पर दुखी होगाहो गया है सवाल ये कैसागर न भी दूँ जवाब ही होगामैं अगर ख़्वाब पर यक़ीं कर लूँजो दिखा है अलामती होगातुम नहीं ख़्वाब में मिरे जानाँतो यही ख़्वाब आख़िरी होगा— Taufique Habib