मुझे भी पता है ज़माने का दुख

फ़ुलाँ और फ़ुलाँ को गँवाने का दुख

जले जो ख़ुदा दिल भी उस का कभी
कभी हो उसे दिल जलाने का दुख

किसी को नहीं है पता है मुझे
ख़बर मुस्तरद होते जाने का दुख

बनाओ बहाने तरह सौ तरह
लगेगा पता हर बहाने का दुख

किसी ने कटा ली हमारे लिए
हमें है ख़ुदा सर बचाने का दुख

— Taufique Habib

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