नीम के साए में
एक खुरदुरे फ़ुट-पाथ पर
लहकते सूरज से परे
शिकस्ता चोबी गाड़ी की ज़मीं पे
टेढ़े मेढ़े हाथ पाँव में
उलझती हयात
ग़म-ज़दा आँखों के दर्द
लब पे इक ख़ामोश कर्ब
मुँह से कुछ बहते लुआब
अपनी जानिब
खींचते हैं
बोलते सुकूँ के ढेर
— Jafar Sahni
एक खुरदुरे फ़ुट-पाथ पर
लहकते सूरज से परे
शिकस्ता चोबी गाड़ी की ज़मीं पे
टेढ़े मेढ़े हाथ पाँव में
उलझती हयात
ग़म-ज़दा आँखों के दर्द
लब पे इक ख़ामोश कर्ब
मुँह से कुछ बहते लुआब
अपनी जानिब
खींचते हैं
बोलते सुकूँ के ढेर
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