daad to baad men kamaayenge | दाद तो बाद में कमाएँगे

  - Jawwad Sheikh

दाद तो बाद में कमाएँगे
पहले हम सोचना सिखाएँगे

मैं कहीं जा नहीं रहा लेकिन
आप क्या मेरे साथ आएँगे

कोई खिड़की खुलेगी रात गए
कई अपनी मुराद पाएँगे

खुल के रोने पे इख़्तियार नहीं
हम कोई जश्न क्या मनाएँगे

हँसेंगे तेरी बद-हवा सेी पर
लोग रस्ता नहीं बताएँगे

तुम उठाओगे कोई रंज मिरा
दोस्त अहबाब हज़ उठाएँगे

हमें अपनी तलाश में मत भेज
खड़ी फ़सलें उजाड़ आएँगे

  - Jawwad Sheikh

Festive Shayari

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