मैं ने चाहा तो नहीं था कि कभी ऐसा हो
लेकिन अब ठान चुके हो तो चलो अच्छा हो
तुम से नाराज़ तो मैं और किसी बात पे हूँ
तुम मगर और किसी वजह से शर्मिंदा हो
अब कहीं जा के ये मालूम हुआ है मुझ को
ठीक रह जाता है जो शख़्स तेरे जैसा हो
ऐसे हालात में हो भी कोई हस्सास तो क्या
और बे-हिस भी अगर हो तो कोई कितना हो
ताकि तू समझे कि मर्दों के भी दुख होते हैं
मैं ने चाहा भी यही था कि तेरा बेटा हो
— Jawwad Sheikh















