"प्रेम डोर"

प्रेम की वो एक चादर ओढ़कर हम सो गए हैं
हम तुम्हारे थे तुम्हारे और तुम्हारे हो गए हैं

प्रेम है लौकिक अलौकिक प्रेम जग की रीत भी है
प्रेम है ग़ज़लें हमारी प्रेम अपना गीत भी है

प्रेम से करते है हल हम हर जटिल से प्रश्न को हैं
प्रेम की तागत से गोपी जीत लेतीं कृष्ण को हैं

शस्त्र से जीता न जाए प्रेम से हम मात देंगे
तुम से करते एक वा'दा ज़िन्दगी भर साथ देंगे

— Jitendra "jeet"

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