KHud hi ab apni kahaanii likh rahe hain | ख़ुद ही अब अपनी कहानी लिख रहे हैं

  - "Nadeem khan' Kaavish"

ख़ुद ही अब अपनी कहानी लिख रहे हैं
उस
में अपने आँसू, पानी लिख रहे हैं

इसने तेरे जैसी ही बर्बादी दी है
यार तुझको हम जवानी लिख रहे हैं

प्यास से हम मर गए थे यार इक शब
तो समंदर पे रवानी लिख रहे हैं

साथ था जिन शामों में तू, छोड़कर वो
अब तो हर शा
में सुहानी लिख रहे हैं

यार अब तो काफ़ी ज़्यादा सज गई हो
फिर भी तुमको हम पुरानी लिख रहे हैं

मेरी गज़लें गुनगुनाती थी वो हर शब
उसको मीरा सी दिवानी लिख रहे हैं

'जौन' को पढ़-पढ़ के आँखें लाल सी हैं
और अब बदले में जानी लिख रहे हैं

  - "Nadeem khan' Kaavish"

Nature Shayari

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