ham ko to be-sawaal mile be-talab mile | हम को तो बे-सवाल मिले बे-तलब मिले

  - Kaleem Aajiz

हम को तो बे-सवाल मिले बे-तलब मिले
हम वो नहीं हैं साक़ी कि जब माँगें तब मिले

फ़रियाद ही में अहद-ए-बहाराँ गुज़र गया
ऐसे खुले कि फिर न कभी लब से लब मिले

हम ये समझ रहे थे हमीं बद-नसीब हैं
देखा तो मय-कदे में बहुत तिश्ना-लब मिले

किस ने वफ़ा का हम को वफ़ा से दिया जवाब
इस रास्ते में लूटने वाले ही सब मिले

मिलते हैं सब किसी न किसी मुद्दआ' के साथ
अरमान ही रहा कि कोई बे-सबब मिले

रक्खा कहाँ है 'इश्क़ ने 'आजिज़' को होश में
मत छेड़ियो अगर कहीं वो बे-अदब मिले

  - Kaleem Aajiz

Charagh Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Kaleem Aajiz

As you were reading Shayari by Kaleem Aajiz

Similar Writers

our suggestion based on Kaleem Aajiz

Similar Moods

As you were reading Charagh Shayari Shayari