तो क्या हुआ कहने को अगर बोल नहीं है

जज़्बा जो बयाँ हो गया बे-मोल नहीं है

मेरे इन इशारों ने उसे कर दिया बे-चैन
कहना तो बहुत कुछ है मगर बोल नहीं है

जिस को तू कहे भीड़ तिरा अक्स है ग़ाफ़िल
पर्दा न उठाना कि तिरा डोल नहीं है

उस्ताद ने भूगोल बहुत ख़ूब बताया
दादी के हिसाबात से तो गोल नहीं है

ख़ुदको ही बड़ा बोल बड़े बोल में कहता
यारों ने कहा है कि मिरा तोल नहीं है

सब को है ग़लत-फ़हमी कि ना-अहल है माही
दिल-फेंक तबीअत है कोई झोल नहीं है

— Karal 'Maahi'

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