आप ने जिस पाँव में काँटा चुभा रहने दिया

हम ने भी उस पाँव को कुछ दिन खुला रहने दिया

जानता हूँ इश्क़ में कितना नफ़ा नुक्सान है
इस लिए जो थे ख़फा उन को ख़फा रहने दिया

बंद कमरे में कहाँ तक रौशनी जाए बता
घर वही रौशन हुआ, जो घर खुला रहने दिया

बीज दफ़ना दें अगर तो फल उगल देगी ज़मीं
बस यही सब सोच कर ग़म को दबा रहने दिया

ज़िंदगी टूटे हुए ख़्वाबों का मलबा है 'सहर'
मौत ने सब कुछ चुना, हम को पड़ा रहने दिया

— Karan Sahar

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