हमेंअपनोंसेक्यूँँलड़वारहेहैं
सियासतबीचमेंक्यूँँलारहेहैं
मसाइलऔरभीहैंशहरमेंपर
गड़ेमुर्देउखाड़ेजारहेहैं
हमारीनींदकबकीउड़गईहै
तुम्हारेदिनभीअच्छेआरहेहैं
ख़मोशीइसलिएभीबढ़रहीहै
ज़बाँवालेतोमारेजारहेहैं
हमारेआशियानेतोड़करवो
फ़रिश्तोंकेमकाँबनवारहेहैं
बनाईचायऐसीमीडियाने
कमलकेस्वादजिसमेंआरहेहैं
ग़रीबीकोमिटानेवालेथेजो
ग़रीबोंकोमिटातेजारहेहैं
नज़रआतेजहाँसेकामकाले
वहाँपर्देहरेलगवारहेहैं
नईनस्लोंकोमज़हबमेंफँसाकर
क़लमसेदूरकरतेजारहेहैं
किसानीख़ुद-कुशीकरलेगीइकदिन
किसानोंपेवोदिनभीलारहेहैं