mere ghamkhwaar waqt lagta hai | मेरे ग़मख़्वार वक़्त लगता है

  - Kashif Adeeb Makanpuri

मेरे ग़मख़्वार वक़्त लगता है
प्यार है प्यार वक़्त लगता है

प्यार में सब्र भी ज़ुरुरी है
होगा इज़हार वक़्त लगता है

दिल में ऐसे जगह नहीं मिलती
मेरे सरकार वक़्त लगता है

रंग अपना दिखाएंगे इक दिन
गुल हों या ख़ार वक़्त लगता है

उनकी ज़ुल्फ़ों कि जाल में मुजरिम
हो गिरफ़्तार वक़्त लगता है

तेरे पीछे चलेगा ख़ुश हो कर
सारा संसार वक़्त लगता है

पारसा ऐसे कैसे हो जाए
इक गुनहगार वक़्त लगता है

मुझ सेे मिलने को मेरे ख़्वाबों में
तुझको हर बार वक़्त लगता है

लोग जिसकी मिसाल देते रहें
हो वो किरदार वक़्त लगता है

क्या हुआ क्यूँँ उलझ गये काशिफ़
होंगे अशआर वक़्त लगता है

  - Kashif Adeeb Makanpuri

Valentine Shayari

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