haar kar laute musaafir kahiye kya satkaar den | हार कर लौटे मुसाफ़िर कहिए क्या सत्कार दें

  - Shayra kirti

हार कर लौटे मुसाफ़िर कहिए क्या सत्कार दें
हो नया आगाज़ या वो ही पुराना प्यार दें

और कहिए आज़माइश दुनिया की कैसी रही
क्या मिले ऐसे भी कुछ जो हम सेे बढ़कर प्यार दें

जान-ओ-दिल खाएँगे या फिर पहले पीने को जनाब
हिज़्र में जोड़े गए नम आँसुओं का खार दें

बे-वफ़ाई दिल दुखाना ये तो अदने ज़ुल्म हैं
और गिरिए गिरने को इक बरतरी मेयार दें

आप ही से इल्तिज़ा है लौट कर मत आइए
हम
में तो हिम्मत नहीं के आपको दुत्कार दें

आज बेहद ग़ौर से इस कीर्ति को देखिए
और पहले वाली अपने ज़हन-ओ-दिल में मार दें

  - Shayra kirti

Irada Shayari

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