न तो पूछा न ही बताया है
बस किया वो जो मन में आया है
न ज़रूरत ही है उसे मेरी
न ही जाने का हुक़्म आया है
प्यार हो या हो दोस्ती उसकी
एक-तरफ़ा ही सब निभाया है
आते जातों को देखते मैंने
उस बड़े दिल में सिन बिताया है
जेब में उसकी इक मिला झुमका
मेरा हक़ जाने किसने खाया है
कल ही नंबर किया डिलीट उसका
आज फिर उसका कॉल आया है
हक़ नमक का अदा किया होगा
प्यार उसने मेरा गँवाया है
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shayra kirti
our suggestion based on Shayra kirti
As you were reading Love Shayari Shayari