न तो पूछा न ही बताया है
बस किया वो जो मन में आया है
न ज़रूरत ही है उसे मेरी
न ही जाने का हुक़्म आया है
प्यार हो या हो दोस्ती उस की
एक-तरफ़ा ही सब निभाया है
आते जातों को देखते मैं ने
उस बड़े दिल में सिन बिताया है
जेब में उस की इक मिला झुमका
मेरा हक़ जाने किस ने खाया है
कल ही नंबर किया डिलीट उस का
आज फिर उस का कॉल आया है
हक़ नमक का अदा किया होगा
प्यार उस ने मेरा गँवाया है
— Shayra kirti















