आजकल की आशिक़ी का है 'अजब ही क़ायदा
मिल गई तो दिलरुबा और ना मिले तो बेवफ़ा
दिल फ़रेबों की हुकूमत हर कहीं आबाद है
दिल शनासो की मुसीबत हुस्न का ये दबदबा
दोस्ती के नाम पर लूटे गए थे अब तलक
दुश्मनी में अपना घाटा होगा पहली मर्तबा
और भी बढ़ने लगी है हिज़्र में ख़ुद आगही
और भी होने लगा है बेख़ुदी का फ़ायदा
अब तुम्हारी बात में वो दम नहीं है 'कीर्ति'
मुँह तुम्हारे लग गया है शोहरतों का ज़ायका
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