हुआ जो भी वो अच्छा हो रहा है
इरादा और पुख़्ता हो रहा है
नहीं काबिल भरोसे के कोई भी
हमें इस का भरोसा हो रहा है
अब औरों से वो धोखे खा रहा है
पुराना कर्ज़ चुकता हो रहा है
तुम्हें रो रो के कल जो रोकती थी
उसी लड़की का रोका हो रहा है
बुरे इस वक़्त के मैं जाऊँ सदके
मुखौटों का खुलासा हो रहा है
— Shayra kirti















