तुझ
में बीते दिन
तुझ
में बीतीं रातें
मेरा ये जीवन
तेरी सौगातें
सुब्ह की धूप
रात की चाँदनी
जीवन की डोर
तुझी से बाँधनी
तुझ से शुरू ज़िन्दगी
तुझ पे खतम
जब तू है साथ
फिर ना कोई ग़म
ये चार पल का फसाना
आना और जाना
तुम से दिल लगाना
रूठना और मनाना
चाहतों की कहानी
सुन ले मेरी ज़ुबानी
तोड़ना फिर जोड़ना
मुझ से मुँह ना मोड़ना
— Kumar Rishi















