KUNAL
KUNAL
Ghazal

नन्हें और नादाँ इस दिल को बना खुर्रांट दिया मैं ने

ख़ुशियाँ जब फूली न समाईं उन को डाँट दिया मैं ने

हुस्न मुहब्बत इश्क़ उदासी साथ निभाने सब आए
साथ रखी ता-उम्र उदासी और सब छाँट दिया मैं ने

रूह तुम्हारी जिस्म सभी का ऐसे उम्र गुज़ारी फिर
दिल को टुकड़े टुकड़े कर के सब में बाँट दिया मैं ने

— KUNAL

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