याद आना तुझे चाहता हूँ याद आए तेरी चाहता हूँ
मैं तेरा होना भी चाहता हूँ मैं तुझे पाना भी चाहता हूँ
जीने मरने की क़स
में हैं झूठी खा रहा हूँ भले साथ हर दम
साथ जीना तो है मुझ को तेरे मौत पहले मेरी चाहता हूँ
सिर्फ़ मौसम बहाराँ नहीं गर हो ख़िज़ाँ भी अगर फ़र्क क्या है
मुझ को उगना है डाली पे तेरी सूख झड़ जाना भी चाहता हूँ
यूँ ही होकर के मैं तुम से ग़ुस्सा बंद कर दूँ कभी करनी बातें
तुम से लड़ने को यूँ बे-वजह ही मैं बहाना कोई चाहता हूँ
बस मुहब्बत नहीं दरमियाँ हो साथ में हों ये शिकवे गिले भी
रूठना भी कभी मुझ को तुम से और मनाना कभी चाहता हूँ
जीत लूँ मैं मुहब्बत में तुझ को सिर्फ़ इतना ही मक़सद नहीं है
बस मुहब्बत को पाना नहीं है क्या निभाना है जी चाहता हूँ















