मिरे हाथों में जो ये धारियाँ हैं
फ़क़त किस्मत की ही बेकारियाँ हैं
शज़र को यार अपना तुम बनाओ
यहाँ मतलब की सारी यारियाँ हैं
मिरे हिस्से में क्या आया बताऊँ
ग़ज़ल की चार प्यारी कारियाँ हैं
किसी को भागने का मन है केवल
किसी के सर पे जिम्मेदारियाँ हैं
कहूँ सच खेल को मैं हार लेता
मगर मेरी अभी कुछ बारियाँ हैं
हमें तुम ब्लाॅक करना चाहती हो
कहो सीधे की बस दुश्वारियाँ हैं
— Kush Pandey ' Saarang '















