"तेरे जाने पे"

तेरे जाने पे रोया ज़रूर था
मगर टूटा नहीं था मैं
मैं आशिक़ सच्चा था
तेरी तरह झूठा नहीं था मैं
तुझे जाना ही था
तो चुप-चाप चली जाती
तोड़ने को कोई
खिलौना नहीं था मैं

तेरे जाने पे रोया ज़रूर था
मगर टूटा नहीं था मैं

तेरे वादे-क़समों की याद में
रोया भी और हँसा भी
तेरी झूठी ख़्वाहिशों के नीचे
दबा भी और पिसा भी
तुझे लगा चुप रहता हूँ मैं
कोई मासूम बच्चा नहीं था मैं

तेरे जाने पे रोया ज़रूर था
मगर टूटा नहीं था मैं

तेरी यादों में दिन और रात
दोनों गुज़ार लिया करता हूँ मैं
पहले तेरे नैनों से
तो अब मैख़ानों से पी लिया करता हूँ मैं
तुझे लगा नशे में रहता हूँ, कोई शराबी नहीं था मैं

तेरे जाने पे रोया ज़रूर था
मगर टूटा नहीं था मैं

सोचता हूँ तू तो
प्यार-प्यार किया करती थी
'कुशल' से जुदाई की बात पर
मर जाने की बात किया करती थी
तुझे लगा तेरे खेल को न समझ पाऊँगा मैं
न समझ पाऊँ कोई गँवार नहीं था मैं

तेरे जाने पे रोया ज़रूर था
मगर टूटा नहीं था मैं
मैं आशिक़ सच्चा था
तेरी तरह झूठा नहीं था मैं
तुझे जाना ही था
तो चुप चाप चली जाती
तोड़ने को कोई
खिलौना नहीं था मैं

तेरे जाने पे रोया ज़रूर था
मगर टूटा नहीं था मैं

— Kushal "PARINDA"

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