तू शा'इरी को मेरी तिजारत न समझियो
मेहनत है मेरी इसको तू किस्मत न समझियो
तेरी दलीलें सारी की सारी ही व्यर्थ हैं
उस रब के दर को अपनी अदालत न समझियो
आदत है उस की सब को ही अपना समझता है
मीठी ज़बान को तू मोहब्बत न समझियो
तेरे लिए तो लड़ भी ज़माने से लेंगे हम
ये इश्क़ है इसे तू शरारत न समझियो
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